Bihar Board Class 10 Geography Solutions Chapter 3 निर्माण उद्योग

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions Geography भूगोल : भारत : संसाधन एवं उपयोग Chapter 3 निर्माण उद्योग Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science Geography Solutions Chapter 3 निर्माण उद्योग

Bihar Board Class 10 Geography निर्माण उद्योग Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इनमें स कौन औद्योगिक अवस्थिति का कारक नहीं है ?
(क) बाजार
(ख) जनसंख्या
(ग) पूँजी
(घ) ऊर्जा
उत्तर-
(ख) जनसंख्या

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प्रश्न 2.
भारत में सबसे पहले स्थापित लौह इस्पात कंपनी निम्नांकित में से कौन है ?
(क) भारतीय लोहा और इस्पात कंपनी
(ख) टाटा लोहा इस्पात कंपनी
(ग) बोकारो स्टील सिटी
(घ) विश्वेश्वरैया लोहा और इस्पात उद्योग
उत्तर-
(ख) टाटा लोहा इस्पात कंपनी

प्रश्न 3.
पहली आधुनिक सूती निम्न मिल मुंबई में स्थापित की गई थी, क्योंकि.
(क) मुंबई एक पत्तन है
(ख) यह कपास उत्पादक क्षेत्र के निकट स्थित है.
(ग) मुंबई में पूँजी उपलब्ध थीं
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर-
(घ) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 4.
निम्नांकित में से कौन उद्योग कृषि पर आधारित नहीं है ?
(क) सूती वस्त्र
(ख) सीमेंट
(ग) चीनी
(घ) जूट वस्त्र
उत्तर-
(ख) सीमेंट

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प्रश्न 5.
हुगली औद्योगिक प्रदेश का केन्द्र है ?
(क) कोलकाता-रिसड़ा
(ख) कोलकाता-कोनागरि
(ग) कोलकाता-मोदिनीपुर
(घ) कोलकाता-हावड़ा
उत्तर-
(घ) कोलकाता-हावड़ा

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के अन्तर्गत आता है.?
(क) जे.के. सीमेंट उद्योग
(ख) टाटा लौह एवं इस्पात
(ग) बोकारो लौह इस्पात उद्योग
(घ) रेमण्ड कृत्रिम वस्त्र उद्योग
उत्तर-
(ग) बोकारो लौह इस्पात उद्योग

प्रश्न 7.
इनमें से कौन उपभोक्ता उद्योग है ?
(क) पेट्रो-रसायन
(ख) लौह-इस्पात
(ग) चीनी उद्योग
(घ) चितरंजन लोकोमोटिव
उत्तर-
(ग) चीनी उद्योग

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से कौन छोटे पैमाने का उद्योग है ?
(क) चीनी उद्योग ।
(ख) कागज उद्योग ।
(ग) खिलौना उद्योग
(घ) विद्युत उपकरण उद्योग
उत्तर-
(ग) खिलौना उद्योग

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प्रश्न 9.
भोपाल त्रासदी में किस गैस का रिसाव हुआ था ?
(क) कार्बन डाईऑक्साइड
(ख) कार्बन मोनोआक्साइंड
(ग) मिथाइल आइसोसाइनाईट
(घ) सल्फर डाईआक्साइड
उत्तर-
(ग) मिथाइल आइसोसाइनाईट

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
विनिर्माण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
कच्चे मालों द्वारा जीवनोपयोगी वस्तुएं तैयार करना विनिर्माण उद्योग कहलाता है। वर्तमान समय में यह किसी भी राष्ट्र के विकास एवं सम्पन्नता का सूचक है। जैसे-कपास से कपड़ा, गन्ने से चीनी, लौह अयस्क के लोहा एवं इस्पात आदि का निर्माण करना।

प्रश्न 2.
सार्वजनिक और निजी उद्योग में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
सार्वजनिक उद्योग-वैसे उद्योग जिनका संचालन सरकार स्वयं करती है, सार्वजनिक उद्योग कहलाता है। जैसे-दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला लोहा इस्पात केन्द्र।
निजी उद्योग-वैसे उद्योग जिनका स्वामित्व किसी एक व्यक्ति या संस्था के पास होता है निजी उद्योग कहलाता है। जैसे-टाटा आयरन एण्ड स्टील कंपनी।

प्रश्न 3.
उद्योगों के स्थानीयकरण के तीन कारकों को लिखिए।
उत्तर-
उद्योगों के स्थानीयकरण के तीन कारक निम्न हैं (i) अनुकूल सुलभता (ii) अनुकूल जलवायु (iii) मानवीय कारक।

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प्रश्न 4.
कृषि आधारित उद्योग और खनिज आधारित उद्योग के अंतर को स्पष्ट करें।
उत्तर-
कृषि आधारित उद्योग वैसा उद्योग जिसके लिए कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है। जैसे-सतीवस्त्र उद्योग, रेशमी और ऊनी वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग, चाय उद्योग, कहवा उद्योग, जूट
खनिज आधास्ति उद्योग–ऐसे उद्योग जो अपने कच्चे माल के लिए खनिजों पर निर्भर है, उन्हें खनिज आधारित उद्योग कहते हैं। लोहा एवं इस्पात, सीमेंट तथा रसायन उद्योग।

प्रश्न 5.
स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को उदाहरण सहित वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर-

  • सार्वजनिक उद्योग-इनका संचालन सरकार स्वयं करती है। जैसे-दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला के लोहा इस्पात केन्द्र।
  • संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग-जब उद्योगों में दो या दो से अधिक व्यक्तियों या सहकारी समितियों का योगदान हो तो उसे संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग कहा जाता है। जैसे आइल इंडिया लिमिटेड, महाराष्ट्र के चीनी उद्योग इत्यादि।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उदारीकरण, निजीकरण और वश्वीकरण से आप क्या समझते हैं ? वैश्वीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है ? इसकी व्याख्या करें।
उत्तर-
उदारीकरण-उद्योग तथा व्यापार को लालफीता शाही के अनावश्यक प्रतिबंधों से मुक्त करके अधिक प्रतियोगी बनाना ही उदारीकरण कहलाता है। –

निजीकरण- देश की स्वस्थ अर्थव्यवस्था को बनाये रखने हेतु देश के अधिकतर उद्योगों के नियंत्रण पर सरकारी एकाधिकार को कम कर या समाप्त कर उसके स्वामित्व को निजी हाथों में सौंप देना ही निजीकरण कहलाता है।

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वैश्वीकरण-वैश्वीकरण का अर्थ है देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना, अर्थात् प्रत्येक देश का अन्य देशों के साथ बिना किसी प्रतिबंध के पूँजी, तकनीकी एवं व्यापारिक आदान-प्रदान ही वैश्वीकरण है।

भारत सरकार की नवीन आर्थिक नीतियाँ वैश्वीकरण को परिभाषित करने में लगी हुई हैं। हमारा उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ तारतम्य बनाना है।

इसके अन्तर्गत सभी वस्तुओं के आयात में खुली छूट, सीमा शुल्क में कमी, विदेशी पूँजी की मुक्त प्रवाह की अनुमति, सेवा क्षेत्र विशेषकर बैंकिंग, बीमा और जहाजरानी क्षेत्रों में विदेशी पूंजी निवेश की छूट और रुपयों को पूर्ण परिवर्तनशील बनाना है। इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति हेतु भारतीय अर्थव्यवस्था का तेजी से वैश्वीकरण हो रहा है। परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में उत्साहवर्द्धक उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं। विदेशी मुद्रा का भण्डार काफी बढ़ गया है, किन्तु निर्यात और कृषि दरों में गतिरोध उत्पन्न हुआ है।

विश्वव्यापी मंदी के बावजूद चीन की छोड़कर अन्य विकासशील देशों की तुलना में भारत में सकल घरेलू उत्पाद की दर अधिक है। किन्तु सामाजिक क्षेत्रों की प्रगति संतोषजनक नहीं है। रोजगार सृजन के अवसर कम हुए हैं। गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। अनाज का विपुल भंडार रहते हुए भी भारी संख्या में भारतवासी कुपोषण के शिकार हैं। इसका मुख्य कारण उनमें क्रयशक्ति की कमी है।

वैश्वीकरण स स्वदेशी उद्योगों विशेषकर कुटीर एवं लघु उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह बात स्पष्ट रूप से कही जा सकती है कि वैश्वीकरण से हमारी अर्थव्यवस्था पर और औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

प्रश्न 2.
भारत में सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग का विवरण दीजिए।
उत्तर-
इस उद्योग को ज्ञान आधारित उद्योग भी कहते हैं क्योंकि इसमें उत्पादन के लिए विशिष्ट नए ज्ञान, उच्च प्रौद्योगिकी और निरंतर शोध और अनुसंधान की आवश्यकता रहती है। यह वह उद्योग है जो मुख्यतः सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित है। इसने देश के आर्थिक ढाँचे तथा लोगों की जीवनशैली में बहुत क्रांति ला दी है।

इस उद्योग के अन्तर्गत आनेवाले उत्पादों में ट्रांजिस्टर से लेकर टी. वी., टेलीफोन, पेपर, राडार, सेल्यूलर टेलीकॉम, लेजर, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष उपकरण, कम्प्यूटर की यंत्र सामग्री (हार्डवेयर) तथा प्रक्रिया सामग्री (सॉफ्टवेयर) इत्यादि हैं। इन्हें उच्च प्रौद्योगिकी भी कहते हैं। इनके प्रमुख उत्पादक केन्द्र बंगलूर, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद, पूणे, चेन्नई, कोलकता, कानपुर तथा लखनऊ हैं। इसके अतिरिक्त 20 सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क हैं जो सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों को एकल विंडो सेवा तथा उच्च ऑकड़े संचार सुविधा प्रदान करते हैं। इसका प्रमुख महत्व रोजगार उपलब्ध कराना है। पिछले दो या तीन वर्षों से यह उद्योग विदेशी मुद्रा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। जिसका कारण तेजी से बढ़ता व्यवसाय प्रक्रिया बाह्यस्रोतीकरण है।

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प्रश्न 3.
भारत में सूतीवस्त्र उद्योग के वितरण का विवरण दें।
उत्तर-
सूतीवस्त्र बनाने में भारत का एकाधिकार बहुत प्राचीन काल से चला आ रहा है। परन्तु पहली आधुनिक सूती मिल की स्थापना सन् 1818 ई. में कोलकता के निकट फोर्ट ग्लास्टर नामक स्थान पर की गयी जो कुछ समय बाद बंद हो गई और पहली सफल मिल मुम्बई में सन् 1854 ई. में काबस जी नाना भाई डाबर ने लगाई और इसके बाद भारत में आधुनिक वस्त्र उद्योग का विकास हुआ। वर्तमान में यह भारत का सबसे विशाल उद्योग है जो कृषि के बाद दूसरा बड़ा रोजगार प्रदान करता है।

इसका वितरण निम्न है-

  • तमिलनाडु- यह भारत का सबसे बड़ा सूती वस्त्र तैयार करने वाला राज्य है। यहाँ 219 मिलें हैं।
  • गुजरात यहाँ मिलों की संख्या 117 है। इसके प्रमुख केन्द्र अहमदाबाद, बड़ौदा, सूरत, भड़ोंच, पोरबंदर, भावनगर एवं नादियार हैं।
  • महाराष्ट्र-यहाँ 107 मिले हैं। यहाँ के मुख्य केन्द्र मुम्बई, शोलापुर, पूणे, वर्धा, नागपुर, औरंगाबाद और जलगाँव हैं।
  • पश्चिम बंगाल- इसके मुख्य केन्द्र आवड़ा, मुर्शिदाबाद, हुगली और श्रीरामपुर हैं।
  • उत्तर प्रदेश- इसके मुख्य केन्द्र मानपुर, मुरादाबाद, आगरा और मोदीनगर हैं।
  • मध्य प्रदेश- ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर और देवास इसके प्रमुख केन्द्र हैं।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1.
भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित को उपयुक्त चिह्नों की सहायता से अंकित कीजिये तथा उनके नाम लिखियो..
(i) निजी क्षेत्र में स्थापित एक प्रसिद्ध लोहा-इस्पात केन्द्र।।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

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(ii) मध्यप्रदेश का सॉफ्टवेयी प्रौद्योगिकी पार्की
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

(iii) बिहार का सॉफ्टवेयी प्रौद्योगिकी पार्क
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

(iv) छत्तीसगढ़ का लोहा-इस्पात संयंत्र
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

(v) चीनी उद्योग का अग्रणी राज्य
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

(vi) सूती वस्त्र उद्योग के प्रधान केन्द्र मुम्बई, कोयम्बटूर अहमदाबाद तथा कानपुरा।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

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अपने शिक्षक की सहायता से भारत में कार्यरत 10 बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की तालिका तैयार कीजिए तथा प्रत्येक के नाम के सामने उन उद्योगों का नाम लिखें जिनसमें उनका निवेश विशेष रूप से हुआ है।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 10 Geography निर्माण उद्योग Additional Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सिंदरी कहाँ स्थित है ?
(क) पश्चिम बंगाल में
(ख) झारखण्ड में
(ग) छत्तीसगढ़ में
(घ) उड़ीसा में
उत्तर-
(ख) झारखण्ड में

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प्रश्न 2.
नेपानगर किस उद्योग के लिए प्रसिद्ध है ?
(क) चीनी
(ख) सीमेंट
(ग) अखबारी कागज
(घ) सूती कपड़ा
उत्तर-
(ग) अखबारी कागज

प्रश्न 3.
चीनी उत्पादन में कौन राज्य भारत में सबसे आगे है ?
(क) प. बंगाल
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) महाराष्ट्र
(घ) पंजाब
उत्तर-
(ग) महाराष्ट्र

प्रश्न 4.
इनमें कौन सूती वस्त्र में अग्रणी है ?
(क) कानपुर
(ख) मुम्बई
(ग) चेन्नई
(घ) नागपर
उत्तर-
(ख) मुम्बई

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प्रश्न 5.
इनमें कौन इस्पात केंद्र समुद्र के निकट है ?
(क) विजयनगर
(ख) बोकारो
(ग) भिलाई
(घ) भद्रावती
उत्तर-
(घ) भद्रावती

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किस योजनाकाल में भारत में औद्योगिकीकरण का विचार प्रस्तुत किया गया ?
उत्तर-
द्वितीय पंचवर्षीय योजनाकाल में भारत में औद्योगिकीकरण का विचार प्रस्तुत किया गया।

प्रश्न 2.
1854 में भारतीय पूँजी से सबसे पहली सूती वस्त्र की मिल कहाँ स्थापित की गयी थी?
उत्तर-
1854 में भारतीय पूँजी से सबसे पहली सूती वस्त्र की मिल मुंबई में स्थापित की गयी थी।

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प्रश्न 3.
भारत का कौन राज्य जूट उत्पादन में अग्रणी है ?
उत्तर-
भारत का पश्चिम बंगाल जूट उत्पादन में अग्रणी राज्य है।

प्रश्न 4.
टीटागढ़ का कागज कारखाना किस राज्य में अवस्थित है ?
उत्तर-
पश्चिम बंगाल में टीटागढ़ का कागज कारखाना अवस्थित है।

प्रश्न 5.
भारत का पहला इस्पात कारखाना किस नदी घाटी में स्थापित हुआ था? :
उत्तर-
भारत में पहला इस्पात कारखाना सबसे पहले 1830 ई. में तमिलनाडु में पोर्टोनोवा नदी घाटी में स्थापित हुआ था।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गौण उत्पाद किसे कहते हैं। एक उदाहरण दें।
उत्तर-
प्राकृतिक उत्पादों में कुछ ऐसे उत्पाद हैं जिन्हें अधिकाधिक उपयोग में लाने के लिए संसाधित करने की आवश्यकता होती है। प्राथमिक उत्पादों को संसाधित करने से जो उपयोगी. पदार्थ प्राप्त होते हैं उन्हें गौण उत्पाद कहते हैं। रूई से तैयार किया गया कपड़ा और लौह अयस्क से तैयार किया गया इस्पात गौण उत्पाद के उदाहरण हैं।

प्रश्न 2.
निर्माण उद्योग से आप क्या समझते हैं ? दो उदाहरण दें।
उत्तर-
अधिक-से-अधिक कच्चा माल जुटाकर इससे बहुमूल्य और अधिक उपयोगी वस्तुओं का अधिकाधिक उत्पादन करने की प्रक्रिया ही निर्माण उद्योग है, अपनी कार्यकुशलता और तकनीकी ज्ञान से जब मानव प्राथमिक उत्पादों को गौण उत्पादों में परिवर्तित करता है तो उसका यह प्रयास और क्रियाशीलन निर्माण उद्योग या सिर्फ निर्माण कहलाता है। उदाहरण के लिए, गन्ने के 10 टन रस से 1 टन चीनी ही बनती है, परन्तु इसका मूल्य रस के मूल्य से 10 गुना हो जाता है। इसी प्रकार कच्चे माल बहुत सस्ते होते हैं, परन्तु उनसे बना माल मूल्यवान हो जाता है। जंगल में पेड़ के पत्ते का कोई मूल्य नहीं, परन्तु उसी से पत्तल बनाकर बेचने पर आमदनी होने लगती है।

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प्रश्न 3.
उद्योगों का विकास क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
उद्योगों के विकास से लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठता है। भारत में कृषि पर आधारित अनेक उद्योग स्थापित हैं। जैसे सूती-वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग, चाय, कॉफी, जूट उद्योग आदि। कुछ उद्योग कृषि के विकास में लगे हैं, जैसे उर्वरक उद्योगा ।

उद्योगों में आत्मनिर्भरता लाने के लिए उच्च कोटि की कार्यकुशलता और प्रतिस्पर्धा लाने की आवश्यकता है। जब तक औद्योगिक उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर का नहीं होगा, तब तक अन्य देशों से हम प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते हैं। विदेशी मुद्रा अर्जित करने के लिए हमें ऐसा करना जरूरी है। विदेशी मुद्रा अर्जित कर राष्ट्रीय सम्पत्ति बढ़ा सकते हैं और देश को खुशहाल बना सकते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भारत में लोहा-इस्पात उद्योग के विकास का सकारण विवरण दें।
उत्तर-
लोहा-इस्पात उद्योग खनिज पर आधारित उद्योगों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण उद्योग है। जिसपर आधुनिक युग के छोटे-बड़े सभी उद्योग आश्रित हैं। भारत में लौह-इस्पात उद्योग का इतिहास अत्यन्त प्राचीन है। दिल्ली स्थित जंगरहित लौह स्तम्भ भारत में प्राचीन काल से ही निर्मित होने वाले उत्तम किस्म के इस्पात का एक सुन्दर उदाहरण है। आधुनिक लोहा और इस्पात कारखानों की स्थापना सन् 1779 ई. में तमिलनाडु के दक्षिण में अर्काट जिले में की गई थी। सभी कच्चे मालों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होने के कारण यह कारखाना असफल रहा। पुनः 1874 ई. में पश्चिम बंगाल में कुल्टी नामक स्थान पर बराकर लौह कम्पनी स्थापित हुई जिसे ब्रिटिश सरकार ने सन् 1882 में अपने नियंत्रण में ले लिया 1918 ई. में हीरापुर में एक इस्पात कारखाने की स्थापना की गई।

1936 ई. में इसे कुल्टी कारखाने में मिलाकर 1952 में इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कम्पनी का नाम दिया गया। स्वतंत्रता के पूर्व श्री जमशेद जी टाटा के द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रयास के तहत 1907 में साकची नामक स्थान पर एक इस्पात कारखाना की स्थापना की गई जो अभी टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी के रूप में देश के निजी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण कारखाना है।

स्वतंत्रता के बाद भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के अन्तर्गत 6 नवीन कारखानों की स्थापना की गई है। ये हैं-राउरकेला (उड़ीसा), भिलाई (मध्य प्रदेश), विशाखापत्तनम् (आंध्र प्रदेश), बोकारो, दुर्गापुर, सलेम। उड़ीसा के पाराद्वीप और कर्नाटक के विजयनगर में अन्य कारखानों का निर्माण हो रहा है। नवीन औद्योगिक नीति के तहतं निजी क्षेत्र में इस उद्योग का तेजी से.विकास हो रहा है।

भारत में लोहा-इस्पात उद्योग का विकास बहुत तेजी गति से हो रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि यहाँ उच्च कोटि का हेमाटाइट और मैग्नेटाइट लौह-अयस्क मिलता है, जिसमें 50% 70% तक लौहांश पाया जाता है। झारखण्ड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में इसका बहुल्य है। कोयले की प्राप्ति रानीगंज, झुरिया, गिरिडीह और बोकारो कोयला क्षेत्रों से की जाती है। गालक के रूप में प्रयुक्त होनेवाले खनिजों की भी यहाँ कमी नहीं है।

उड़ीसा के सुन्दरगढ़, झारखण्ड के राँची, छत्तीसगढ़ के दुर्ग और मध्य प्रदेश के सतना तथा कर्नाटक के शियोगा जिलों में चूनापत्थर के भण्डार मिलते हैं। डोलोमाइट, मैंगनीज और ऊष्मा सह पदार्थ (refractory materials) लौह अयस्क तथा कोयला क्षेत्रों के निकट सुलभ हैं। यही कारण है कि इन सारी आवश्यक सुविधाओं से लबरेज होने के कारण भारत में लोहा-इस्पात उद्योग का विकास बहुत ही तेजी के साथ हो रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि इस विकास की गति को लम्बे समय तक बनाए रखना आवश्यक है। जिससे यहाँ इस उद्योग के विकास की गति और तेज हो सके। जिसके फलस्वरूप यहाँ के लोगों (मजदूरों) कोअधिक-से-अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे और देश का आर्थिक विकास भी अपनी चरम सीमा पर होगा।

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प्रश्न 2.
भारत में सूती कपड़े या चीनी उद्योग का विकास किन क्षेत्रों में और किन कारणों से हुआ है ? विस्तृत विवरण दें।
उत्तर-
भारत सूती वस्त्र का निर्माता प्राचीनकाल से रहा है। मुगलकालीन भारत में ढाका का मलमल विश्वविख्यात था। परन्तु इंग्लैण्ड के औद्योगिक क्रांति ने इसे बर्बाद कर दिया।

आज फिर सूती वस्त्र उद्योग देश का बड़ा उद्योग बन गया है। औद्योगिक उत्पादन में इसका 20% योगदान है। इस उद्योग में लगभग डेढ़ करोड़ लोग लगे हैं। भारत में कुल निर्यात में इसका योगदान 25% है।

सूती-वस्त्र उद्योग की स्थापना सबसे अधिक महाराष्ट्र और गुजरात राज्य में हुआ है। महाराष्ट्र में 122 कारखाने स्थापित हैं। केवल मुंबई महानगर में 62 कारखाने स्थापित हैं। गुजरात दूसरा बड़ा वस्त्र उत्पादक राज्य है। यहाँ 120 कारखाना स्थापित हैं जिनमें 72 कारखाने अहमदाबाद में स्थापित हैं।

महाराष्ट्र और गुजरात राज्य में वस्त्र उद्योग के विकास का मुख्य कारण है कपास की पर्याप्त उपलब्धत, कपास एवं मशीनरी के आयात-निर्यात की सुविधा मुंबई और कांडला बन्दरगाह से प्राप्त है। कुशल कारीगर की उपलब्धता है।

इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, प. बंगाल में भी सूती-वस्त्र उद्योग का अच्छा विकास हुआ है। इन जगहों पर सस्ते श्रमिक, परिवहन के साधन जल-विद्युत की सुविधा उपलब्ध होने के कारण विकास में मदद मिला है।

चीनी उद्योग कृषि पर आधारित उद्योग है। इसका कच्चा माल गन्ना हैं। चीनी उद्योग को गन्ना उत्पादक क्षेत्र में ही स्थापित करना उपयुक्त होता है। इसीलिए चीनी मिलें गन्ना उत्पादक ‘राज्यों में मुख्य रूप से स्थापित की गयी हैं। उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा राज्यों में चीनी की मिलें स्थापित की गयी हैं।उत्तर प्रदेश में चीनी की लगभग 100 मिलें हैं। यहाँ इसके लिए निम्नांकित सुविधाएं उपलब्ध है

  • गन्ने की अच्छी खेती
  • परिवहन की अच्छी व्यवस्था,
  • सस्ते श्रमिक और घरेलू बाजार।

1960 तक यह देश का प्रथम उत्पादक राज्य था। परंतु अब उत्पादन घट कर एक-चौथाई पर आ गया है।
बिहार राज्य में चीनी की बीसों मिलें स्थापित हैं, परंतु उत्पादन कम है। उत्तर भारत में पंजाब और हरियाणा राज्य में भी एक दर्जन से अधिक चीनी की मिलें स्थापित हैं।

दक्षिण भारत में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु में चीनी की मिलें स्थापित . हैं। महाराष्ट्र में चीनी मिलों के लिए निम्नांकित सुविधाएँ प्राप्त हैं-

  • गन्ने की प्रतिहेक्टेयर उपज अधिक, रस का अधिक मीठा होना और रस अधिक . निकलना।
  • उपयुक्त जलवायु।
  • यहाँ चीनी की मिलें स्वयं गन्ने की खेती करती हैं।
  • समुद्री तट के कारण निर्यात की सुविधा। चीनी उत्पादन में आज महाराष्ट्र देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुका है।

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प्रश्न 3.
उद्योगों से होनेवाले प्रदूषण को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
उत्तर-
जब से भारत में औद्योगिकीकरण की शुरूआत हुयी है, तब से भारत में उद्योगों का विकास बहुत तेजी से हुआ है। उद्योगों के विकास होने से यहाँ आर्थिक विकास हुआ है और लोगों को रोजगार के भी अवसर अधिक मात्रा में उपलब्ध हुए हैं। लेकिन उद्योगों के विकास होने से एक ओर अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं तो दूसरी ओर इसके बुरे परिणाम भी हमें झेलने . . पड़ रहे हैं। उद्योगों के विकास होने से प्रदूषण को बढ़ावा मिला है। जो मानव और जीव-जन्तुओं के लिए हानिकारक हैं। लेकिन विगत वर्षों में सरकार द्वारा उचित कदम उठाए गये हैं।

उद्योगों से होनेवाले प्रदूषण को कम करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए

  • कारखानों में ऊंची चिमनियाँ लगायी जाएँ, चिमनियों में इलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण, स्क्रबर । उपकरण तथा गैसीय प्रदूषक पदार्थों को पृथक करने के लिए उपकरण लगाए जाएँ।
  • तापीय विद्युत की जगह जलविद्युतं का उपयोग कर वायु प्रदूषण में कमी लायी जा सकती है।
  • नदियों में गर्म जल तथा अपशिष्ट पदार्थों को प्रवाहित करने से पहले उनका शोधन कर लिया जाए। औद्योगिक कचरों से मिले जल की भौतिक, जैविक तथा रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा शोधन कर पुनःचक्रण (recycling) द्वारा पुनः प्रयोग योग्य बनाया जाए। ..
  • मशीनों, उपकरणों तथा जेनरेटरों में साइलेंसर लगाकर ध्वनि प्रदूषण को रोका जाए। कारखानों में कार्यरत श्रमिकों को कानों पर शोर नियंत्रण उपकरण पहनने के लिए प्रेरित किया जाए।
  • भूमि पर औद्योगिक कचरों को बहुत दिनों तक जमा होने से रोका जाए। _ अतः स्पष्ट है कि कल-कारखाने वाले उद्योगों के बढ़ने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। प्राकृतिक पर्यावरण की गुणवत्ता घटने लगती है। इसलिए इसे रोकने के लिए समुचित कदम उठाए जाने चाहिए।

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Bihar Board Class 10 Geography निर्माण उद्योग Notes

  • कच्चे मालों द्वारा जीवनोपयोगी वस्तुएँ तैयार करना विनिर्माण उद्योग कहलाता है जो किसी
    भी राष्ट्र के विकास और सम्पन्नता का सूचक है।
  • भारत में पहला जूट कारखाना 1855 ई. में कोलकाता के निकट ‘रिसरा’ नामक स्थान पर स्थापित हुआ था।
  • मुम्बई को सूती वस्त्रों की महानगरी कहा जाता है।
  • भारत के सार्वजनिक क्षेत्र की सभी लौह-इस्पात संयंत्रों का प्रबंधन भारतीय इस्पात प्राधिकरण के अधीन है।
  • द्वितीय पंचवर्षीय योजनाकाल के दौरान दुर्गापुर, राउरकेला एवं भिलाई में लौह-इस्पात
    कारखाने लगाये हैं।
  • अन्गोरा कुन खरगोश के रोएँ से बनाया जाता है।
  • वर्तमान समय में सूती-वस्त्र उद्योग की देशभर में 1824 से अधिक मिलें हैं।
  • चीनी का कुल उत्पादन 2000 में 182 लाख टन हुआ।
  • प. बंगाल में जूट मिलें हुगली तट पर बांसबेरिया से बिरलापुर तक स्थापित हैं।
  • देश के कुल निर्यात में वस्त्र उद्योग की भागीदारी 30% है।
  • 1882 ई० में टीटागढ़ (प. बंगाल) में टीटागढ़ पैपर मिल्स की स्थापना की गयी।
  • आज देश में 600 से अधिक लुगदी तथा कागज मिलें हैं।
  • भारत में 10 वृहत एवं 200 से अधिक लधु लोहा एवं इस्पात कारखाने हैं।
  • सकल राष्ट्रीय उत्पादन में निर्माण उद्योगों का हिस्सा 17% है।
  • सूती वस्त्र उद्योग में भारत आत्म-निर्भर है।
  • भारत में अभी लगभग 78 जूट मिलें हैं। जूट के निर्यात में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।
  • लोहा-इस्पात का आधुनिक ढंग का बड़ा कारखाना 1907 ई. में स्वर्ण रेखा घाटी में साकची नामक स्थान पर खोला गया।
  • भारत में सीमेंट का पहला कारखाना 1904 ई. में तमिलनाडु में खुला था।
  • ऐलुमिनियम कारखाने सस्ती बिजली क्षेत्र के निकट स्थापित किए जाते हैं।
  • ताँबा उद्योग के कारखाने घाटशिला (झारखण्ड), खेत्री (राजस्थान) एवं तूतीकोरिन (तमिलनाडु) में हैं।
  • सिंदरी उर्वरक कारखाना झारखण्ड में 1952 ई. में खुला।
  • भारत प्रतिवर्ष 147.81 करोड़ टन सीमेंट तैयार करता है।
  • उद्योगों के विकास से लोगों का जीवन-स्तर ऊँचा होता है।
  • उद्योग-स्थापन के कई कारक हैं, जैसे-कच्चे माल की प्राप्ति, शक्ति आपूर्ति, यातायात की सुविधा, मानव संसाधन, बाजार, राजनीतिक स्थिरता, पूँजी की, सुविधा।
  • स्वामित्व के आधार पर प्रमुख कार्यों के आधार पर, आकार के आधार पर और कच्चे माल … . तथा तैयार माल के भार के आधार पर उद्योगों के कई वर्ग हैं।
  • कच्चे मालों द्वारा जीवनोपयोगी वस्तुएँ तैयार करना विनिर्माण उद्योग कहलाता है जो किसी भी राष्ट्र के विकास और संपन्नता का सूचक है।

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