Bihar Board Class 12th Geography Notes Chapter 22 भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एवं समस्याएँ

Bihar Board Class 12th Geography Notes Chapter 22 भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एवं समस्याएँ

→ पर्यावरण प्रदूषण
पर्यावरण प्रदूषण मानवीय क्रियाकलापों के अपशिष्ट उत्पादों से मुक्त द्रव्य एवं ऊर्जा का परिणाम है।

→ प्रदूषण के प्रकार
प्रदूषकों के परिवहित एवं विसरित होने के आधार पर प्रदूषण के प्रमुख प्रकार हैं –
(1) जल प्रदूषण, (2) वायु प्रदूषण, (3) भू-प्रदूषण, एवं (4) ध्वनि प्रदूषण।

→ 1. जल प्रदूषण

  • • जनसंख्या वृद्धि और उद्योगों के विस्तार के कारण जल के
    अविवेकपूर्ण उपयोग से जल की गुणवत्ता का अत्यधिक निम्नीकरण हुआ है।
  • जल प्रदूषण के स्त्रोत-जल प्रदूषण के दो स्रोत हैं
    • प्राकृतिक स्त्रोत-अपरदन, भू-स्खलन और पेड़-पौधे एवं मृत पशु के सड़ने-गलने से आदि।।
    • मानवीय स्रोत-मानव, जल को उद्योगों, कृषि एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के द्वारा जल को प्रदूषित करता है।
  • जल प्रदूषण के प्रभाव-प्रदूषित जल के सेवन से होने वाले रोग हैं-दस्त, आँतों में कृमि, पीलिया, हेपेटाइटिस आदि।

→ 2. वायु प्रदूषण

  • वायु प्रदूषण को धूल, धुआँ, गैस, कुहासा, दुर्गन्ध और वाष्प जैसे संदूषकों की वायु में अभिवृद्धि व उस अवधि के रूप में लिया जाता है जो मनुष्यों, जन्तुओं और सम्पत्ति के लिए हानिकारक होते हैं।
  • वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव-वायु प्रदूषण के कारण श्वसन तन्त्र, तन्त्रिका तन्त्र तथा रक्त संचार तन्त्र सम्बन्धी विभिन्न रोग होते हैं। वायु प्रदूषण के कारण ही अम्ल वर्षा भी होती है।

→ 3. ध्वनि प्रदूषण

  • विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न ध्वनि का मानव की सहनशक्ति से अधिक व असहज हो जाना ‘ध्वनि प्रदूषण’ है।
  • ध्वनि प्रदूषण के स्त्रोत—विविध उद्योग, मशीनीकृत निर्माण एवं तोड़-फोड़ का कार्य, तीव्रचालित मोटर वाहन और वायुयान, सायरन, लाउड स्पीकर, फेरी वाले तथा सामूहिक गतिविधियों से जुड़े उत्सव आदि।
  • ध्वनि प्रदूषण स्थान विशिष्ट होता है।

→ नगरीय अपशिष्ट निपटान

  • नगरीय क्षेत्रों की पहचान-प्रायः अति संकुल, भीड़-भाड़ तथा तीव्र बढ़ती जनसंख्या के कारण अपर्याप्त सुविधाएँ, गन्दगी का विस्तार एवं प्रदूषित वायु आदि।
  • ठोस अपशिष्ट में विभिन्न प्रकार के पुराने एवं प्रयुक्त सामग्रियाँ शामिल की जाती हैं।
  • ठोस अपशिष्टों का दो स्त्रोतों से निपटान होता है
    (1) घरेलू प्रतिष्ठानों से, एवं (2) व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से।
  • ठोस अपशिष्टों का दुष्परिणाम है-दुर्गन्ध, मक्खियाँ व चूहों से स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरा; जैसे-टाइफॉइड, गलघोंटू, दस्त तथा हैजा आदि।
  • नगरीय क्षेत्रों में औद्योगिक अपशिष्टों से भी अपशिष्ट पदार्थों में वृद्धि होती है।
  • अपशिष्टों को संसाधन के रूप में उपचारित कर इनका ऊर्जा पैदा करने व कम्पोस्ट (खाद) बनाने में प्रयोग किया जाना चाहिए।

→ ग्रामीण नगरीय प्रवास ।
ग्रामीण जनसंख्या शहरों में निम्न कारणों की वजह से प्रवासित होती है (1) मजदूरों की अधिक माँग, (2) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का अभाव, (3) नगरों का विकास आदि

→ गन्दी बस्तियों की समस्याएँ
नगरों में स्थापित गन्दी बस्तियों की प्रमुख समस्याएँ हैं–अवैध निर्माण, गन्दगी का साम्राज्य, अनैतिक . कार्यों का जाल, अपराधियों की शरण-स्थली, मूलभूत सुविधाओं का अभाव आदि।

→ भूमि निम्नीकरण

  • भूमि निम्नीकरण मानव प्रेरित अथवा प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो किसी पारितन्त्र में भूमि को प्रभावशाली __ ढंग से कार्य करने की क्षमता को घटा देती है।
  • भूमि निम्नीकरण का अर्थ है-स्थायी या अस्थायी तौर पर भूमि की उत्पादकता में कमी।
  • भूमि निम्नीकरण दो प्रक्रियाओं के द्वारा तेजी से होता है __ (1) प्रकृति के प्रकोप से, एवं (2) मनुष्य की गलत क्रियाओं से।

→ व्यर्थ भूमि का वर्गीकरण

  1. प्राकृतिक कारकों द्वारा विकृत भूमि,
  2. प्राकृतिक तथा मानवीय कारकों द्वारा विकृत भूमि, एवं
  3. मानवीय क्रियाकलापों द्वारा विकृत भूमि।

→ प्रदूषण मानवीय क्रियाकलापों से उत्पन्न अपशिष्ट उत्पादों के कुछ पदार्थ और ऊर्जा मुक्त होती है जिससे प्राकृतिक पर्यावरण में कुछ परिवर्तन होते हैं। ये परिवर्तन हानिकारक होते हैं।

→ पर्यावरण-वायु, जल, भूमि, वनस्पति, जीव-जन्तु व सूक्ष्म जीवों का समूह। ।

→ जल प्रदूषण-प्राकृतिक या मानवीय क्रियाओं के फलस्वरूप जल की गुणवत्ता में परिवर्तन जिससे वह मानव, जीवों, कृषि, मछली पालन या मनोरंजन के लिए अनुपयुक्त हो जाता है।

→ वायु प्रदूषण वातावरण में किसी भी प्रकार की अनचाही गन्ध, गैस अथवा धूल का सम्मिश्रण तथा रहन-सहन की अवस्था में किसी भी प्रकार का अनावश्यक हस्तक्षेप वायु प्रदूषण कहलाता है।

→ डेसीबल-ध्वनि के माप की इकाई।

→ ध्वनि प्रदूषण-आवश्यकता से अधिक तेज ध्वनि जो कानों को अप्रिय लगती है।

→ जलाक्रान्ति–जलोढ़ में जल-तल का ऊपर उठना जिससे संतृप्तता का क्षेत्र पौधों की जड़ों तक आ जाता है।

→ लवणता—किसी घोल में सामान्य लवण की सान्द्रता।

→ शोर–अवांछनीय कर्कश ध्वनि।

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