Bihar Board Class 12th Geography Notes Chapter 16 जल संसाधन

Bihar Board Class 12th Geography Notes Chapter 16 जल संसाधन

→ जल का महत्त्व, क्षेत्र व उपयोगिता

  • जल हमारे लिए सबसे मूल्यवान सम्पदा है। जल से हमारी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।
  • जल पृथ्वी पर जीवन का आधार है।
  • पृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत धरातल पानी से आच्छादित है, परन्तु अलवणीय जल कुल जल का लगभग 3 प्रतिशत ही है।
  • जल का उपयोग कृषि, उद्योग, घरेलू कार्य, सिंचाई, जलविद्युत आदि कार्यों में किया जाता है।
  • जल की सीमित आपूर्ति भी अत्यधिक उपयोग, प्रदूषण/अप्रबन्धन के कारण उपयोग के अयोग्य हो सकती है।

→ भारत में जल संसाधन

  • भारत, विश्व के केवल 2.45 प्रतिशत क्षेत्र पर विस्तृत है और इस देश में विश्व की 16 प्रतिशत से भी अधिक जनसंख्या निवास करती है, लेकिन यहाँ पर विश्व के कुल 4 प्रतिशत जल संसाधन ही उपलब्ध हैं।
  • देश में कुल उपयोगी जल संसाधन 1,122 घन किमी है।

→ धरातलीय जल संसाधन

  • धरातलीय जल हमें नदियों, तालाबों, झीलों तथा अन्य जलाशयों के रूप में मिलता है।
  • सबसे अधिक धरातलीय जल नदियों से प्राप्त होता है। कुल धरातलीय जल का लगभग 60 प्रतिशत भाग भारत की तीन प्रमुख नदियों-सिन्धु, गंगा और ब्रह्मपुत्र में से होकर बहता है।

→ भौम अथवा भूगर्भिक जल संसाधन

  • अनुमान है कि भारत में कुल आपूरणीय भौम जल क्षमता लगभग 433.9 अरब घन मीटर है।
  • भूगर्भिक जल के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक हैं चट्टानों की संरचना, धरातलीय दशा तथा जलापूर्ति की दशा आदि।
  • भारत में उत्तरी मैदान में भूगर्भिक जल के विशाल भण्डार हैं। लगभग 42 प्रतिशत से भी अधिक भौम जल भारत के विशाल मैदानों के राज्यों में पाया जाता है।
  • प्रायद्वीपीय भारत में कठोर तथा अप्रवेश्नीय चट्टानों के कारण जल रिसकर नीचे नहीं जा सकता है, अतः भूगर्भिक जल का अभाव पाया
    जाता है।
  • भौम जल का सर्वाधिक उपयोग (लगभग तीन-चौथाई) सिंचाई के लिए किया जाता है।

→ जल की माँग और उपयोग

  • भारत में दो-तिहाई से अधिक जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है। . कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए सिंचाई आवश्यक है।
  • सिंचाई के लिए महत्त्वपूर्ण बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाएँ—भाखड़ा नांगल, हीराकुंड, दामोदर घाटी, नागार्जुन सागर, इन्दिरा गांधी नहर परियोजना आदि।
  • कृषि क्षेत्र में धरातलीय जल का 89 प्रतिशत और भौम जल का 92 प्रतिशत उपयोग किया जाता है।
  • भविष्य में विकास के साथ-साथ देश में औद्योगिक और घरेलू सेक्टरों में जल उपयोग बढ़ने की .. सम्भावना है।

→ सिंचाई के लिए जल की माँग
भारत में सिंचाई की आवश्यकता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

  1. वर्षा का असमान स्थानिक वितरण
  2. वर्षा का असमान कालिक वितरण
  3. वर्षा की अधिक परिवर्तनशीलता
  4. वर्षा की अनिश्चितता
  5. फसलों की प्रकृति
  6. अधिक उपज देने वाली फसलें
  7. लम्बा वृद्धिकाल, एवं
  8. उत्पादकता में वृद्धि आदि।

→ कुओं और नलकूपों द्वारा सिंचाई

  • कुओं एवं नलकूपों द्वारा सिंचाई भौम जल के प्रयोग से होती है। भारत में आधे-से-अधिक कृषि में कुओं एवं नलकूपों द्वारा सिंचाई की जाती है।
  • पंजाब व हरियाणा में कुओं व नलकूपों द्वारा सिंचाई का बड़ा महत्त्व है।

→ सम्भावित जल समस्या ।।
जल संसाधन की प्रमुख समस्याएँ हैं-जल की उपलब्धता की, जल के उपयोग की, जल की गुणवत्ता की तथा जल के प्रबन्ध की आदि।

→ जल के गुणों का ह्रास

  • जल गुणवत्ता से तात्पर्य जल की शुद्धता या अनावश्यक बाहरी पदार्थों से रहित जल से है। जल बाह्य पदार्थों जैसे सूक्ष्म जीवों, रासायनिक पदार्थों, औद्योगिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थों से प्रदूषित होता है।
  • जल को प्रदूषित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान औद्योगिक अपशिष्टों का है।

→ जल संसाधनों का संरक्षण
जल संसाधनों के संरक्षण के लिए आवश्यक तीन कदम हैं –

  1. जल बचत की तकनीक तथा विधियों का विकास करना।
  2. जल को प्रदूषण से बचाना।
  3. जल संभर विकास, वर्षाजल संग्रहण, जल के पुन:चक्रण और पुन: उपयोग आदि।

→ जल प्रदूषण का निवारण

  • केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड एवं राज्य प्रदूषण नियन्त्रण दोनों मिलकर राष्ट्रीय जल संसाधन की गुणवत्ता की मॉनीटरिंग कर रहे हैं।
  • सरकार द्वारा जल प्रदूषण को रोकने के लिए की गई वैधानिक व्यवस्थाएँ हैं—जल अधिनियम, 1974; पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम, 1986; जल उपकर अधिनियम, 1977 आदि।

→ जल का पुनःचक्रण एवं पुन: उपयोग
पुन: चक्र और पुन: उपयोग, अन्य रास्ते हैं जिनके द्वारा अलवणीय जल की उपलब्धता को सुधारा जा सकता है।

→ जल संभर प्रबन्धन

  • जल संभर प्रबन्धन से तात्पर्य मुख्य रूप से, धरातलीय और भौम जल संसाधनों के दक्ष प्रबन्धन से है।
  • विस्तृत अर्थ में जल संभर प्रबन्धन में सभी संसाधनों—प्राकृतिक और जल संभर सहित मानवीय संसाधनों के संरक्षण, पुनरुत्पादन और विवेकपूर्ण उपयोग को शामिल किया जाता है।

→ वर्षाजल संग्रहण

  • वर्षाजल संग्रहण विभिन्न उपयोगों के लिए वर्षाजल को रोकने और एकत्र करने की विधि है। इसका उपयोग भूमिगत जल स्रोतों के पुनर्भरण के लिए किया जाता है।
  • वर्षाजल संग्रहण की महत्त्वपूर्ण तकनीकें हैं-छत से वर्षाजल का संग्रहण, खुदे हुए कुओं का पुनर्भरण, हैण्डपम्पों का पुनर्भरण, रिसाव गड्ढों का निर्माण, खेत के चारों तरफ खाइयाँ और छोटी-छोटी सरिताओं पर बंधिकाएँ और रोक बाँध बनाना आदि।

→ भारतीय राष्ट्रीय जल नीति, 2012.
यह नीति जल आवंटन के लिए प्राथमिकताएँ तय करती है। ये प्राथमिकताएँ हैं-पेयजल, सिंचाई, जलशक्ति, नौकायन, औद्योगिक एवं अन्य उपयोग।

→ हेक्टेयर मीटर जल-यदि एक हेक्टेयर समतल भूमि पर, एक मीटर की ऊँचाई तक जल को स्थिर रखा जाए तो जल का कुल आयतन एक हेक्टेयर मीटर होगा।

→ घन मीटर जल-यदि एक वर्ग मीटर समतल भूमि पर, एक मीटर ऊँचाई तक जल भरा रहे, तो उस पूरे जल का आयतन एक घन मीटर होगा।

→ घन किलोमीटर जल-यदि एक वर्ग किमी समतल भूमि पर एक किमी की ऊँचाई तक जल को स्थिर रखा जाए तो जल का कुल आयतन एक घन किलोमीटर होगा।

→ धरातलीय (पृष्ठीय) जल-वर्षा का जल बहकर तालाबों, झीलों और नदियों में चला जाना।

→ भूमिगत जल-वर्षा के जल की कुछ मात्रा मृदा में प्रवेश कर भूमिगत हो जाती है, उसे भौम … जल/भूमिगत जल कहा जाता है।

→ सिंचाई-वर्षा के अभाव में शुष्क खेतों तक मानव द्वारा जल पहुँचाने की व्यवस्था।

→ चक्रीय संसाधन-ऐसे संसाधन जिन्हें प्रयोग के बाद शुद्ध करके बार-बार उपयोग में लाया जाता है।

→ प्रवेश्य चट्टान-वे चट्टानें जिनकी दरारों, सन्धियों और संस्तरण तल से होकर जल भूपृष्ठ से नीचे जा सकता हो।

→ लैगून-हिन्दी में इसे ‘अनूप’ कहते हैं। यह खारे जल का वह क्षेत्र होता है जो सागर तट पर निम्न रेत
के किनारे द्वारा सागर से अलग किया हुआ होता है।

→ पश्च जल-किसी नदी से संलग्न वह स्थिर जल क्षेत्र जो नदी की धारा से प्रभावित नहीं होता या उसमें प्रवाह गति अत्यन्त कम होती है। यह क्षेत्र उस स्थान पर तेजी से विकसित होता है जहाँ सरिता दो भागों में बँट जाती है।

→ जलभृत-पारगम्य शैल की परत, जिसमें जल भरा रहता हो; जैसे-चाक और बलुआ पत्थर।

→ जल संभर या जल विभाजक-वह उत्थित सीमा, जो विभिन्न अपवाह तन्त्रों में बहने वाली सरिताओं के शीर्ष भागों को पृथक करती है।

→ वर्षाजल संग्रहण-वर्षा के जल को भविष्य में उपयोग के लिए एकत्र करना।

Bihar Board Class 12th Geography Notes

Leave a Comment